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समय से पूर्व प्रसव होने पर चिकित्सकों के सलाह अनुसार ही कराएं उपचार
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- Feb 19, 2022
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- जच्चा-बच्चा दोनों को परेशानियों का करना पड़ सकता है सामना
- समय से पूर्व प्रसव होने पर शिशु रहता है बेहद कमजोर, इसलिए उचित इलाज जरूरी
खगड़िया, 19 फरवरी।
हर महिला में गर्भावस्था के दौरान ससमय एवं सुरक्षित प्रसव होने की लालसा रहती है। इस दौरान मन में तरह-तरह के सवाल और खुशियाँ भी रहती है। हालाँकि, इस दौरान थोड़ी सी अनदेखी और लापरवाही बड़ी मुश्किल बन जाती और महिलाओं को तरह-तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। ऐसी ही एक परेशानी समय पूर्व प्रसव होना है, जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए परेशानी बन जाती है। हालाँकि, समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। किन्तु सामान्यतः कमजोर महिलाएं खासकर इस दायरे में आ ही जाती है। समय पूर्व प्रसव में जन्म लेने वाले शिशु भी बेहद कमजोर होते हैं। क्योंकि, समय पूर्व प्रसव होने के कारण शिशु गर्भ के दौरान मानसिक, शारीरिक रूप से संबल नहीं हो पाता है। इसलिए ऐसी स्थिति में जच्चा-बच्चा का योग्य चिकित्सकों के सलाह के अनुसार ही इलाज कराएं। क्योंकि, ऐसे शिशु जन्म लेने के साथ कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं। इसलिए, ऐसे शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए उचित और समुचित इलाज जरूरी है।
- कम उम्र में गर्भधारण से भी होती है समय पूर्व प्रसव :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। जैसे कि माता का 40 किलोग्राम से कम वजन होना, शरीर में खून की कमी, गर्भावस्था के दौरान या प्रसव पूर्व रक्तस्राव होना, गर्भाशय मुख का बेहद कमजोर होना आदि। इसलिए गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए एवं उनके चिकित्सा परामर्श के अनुसार आवश्यक इलाज भी कराना चाहिए। हालाँकि, इसमें कम उम्र में गर्भधारण करना और गर्भावस्था के दौरान उचित खान-पान का सेवन नहीं करना आदि मुख्य कारण हैं। क्योंकि, ऐसी स्थिति में महिलाएँ काफी कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण सुरक्षित प्रसव नहीं हो पाती है।
- क्या है समय से पूर्व प्रसव :
37 हफ्ते के बाद होने वाली प्रसव को सामान्य एवं परिपक्व प्रसव कहा जाता है। किन्तु, इससे पूर्व प्रसव होने पर समय पूर्व प्रसव कहा जाता है। इस स्थिति में माँ के साथ-साथ जन्म लेने वाले शिशु काफी कमजोर होते हैं और दोनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे मानसिक एवं शारीरिक रूप से बेहद कमजोर होते ही हैं। इसके अलावा ऐसे शिशु में स्तनपान के लिए माँ की छाती को चूसने एवं साँस लेने की क्षमता भी नहीं होती है। जिसके कारण बच्चे कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं।
- इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
- मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
- अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
- नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
- लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
- विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
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रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Dr. Rajesh Kumar