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जीविका दीदी टीबी मरीजों की पहचान कर इलाज के लिए करेंगी प्रेरित
-जीविका दीदियों को टीबी की पहचान को लेकर लक्षण की दी गई जानकारी
-सबौर के लैलख में केएचपीटी ने जीविका के प्रशिक्षण का किया आयोजन
भागलपुर, 29 मार्च-
सबौर प्रखंड के लैलख में पर्सपेक्टिव बिल्डिंग वर्कशॉप के तहत जीविका दीदियों को टीबी बीमारी का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। सोमवार को शुरू हुए प्रशिक्षण का समापन मंगलवार को हो गया। प्रशिक्षण का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रोमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने स्वास्थ्य विभाग और जीविका के सहयोग से किया। इस दौरान दीदियों को टीबी बीमारी की पहचान को लेकर उसके लक्षण के बारे में बताया गया, ताकि वह क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान कर उसे इलाज के लिए प्रेरित कर सकें। अगर किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण मिले तो तत्काल क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दिया गया।
केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान दीदियों को बताया गया कि अगर आपके स्वयं सहायता समूह या पड़ोस में किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता से ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। जीविका दीदियां अपने स्वयं सहायता समूह के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगी तो हम समाज से टीबी बीमारी को खत्म कर सकते हैं। मौके पर कृष्णा कुमारी, संदीप कुमार, श्वेता कुमारी और मिथिलेश झा मौजूद थे।
ज्यादातर मामले घनी आबादी वाले इलाके में- जीविका दीदियों को बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो लोगों को तत्काल इलाज कराने के लिए कहें। टीबी का अगर कोई इलाज नहीं कराता है तो यह बीमारी कई लोगों में जा सकता है। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा।
पौष्टिक भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
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रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Dr. Rajesh Kumar