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सिविल सर्जन ने की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षात्मक बैठक
- स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी व सहयोगी स्वास्थ्य संगठन के पदाधिकारी बैठक में हुए शामिल
- सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में सिविल सर्जन की अध्यक्षता में बैठक
खगड़िया, 21 मई-
शनिवार को सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा की अध्यक्षता में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की एक समीक्षात्मक बैठक हुई। जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के अलावा केयर इंडिया, पिरामल स्वास्थ्य समेत अन्य सहयोगी स्वास्थ्य संगठन के पदाधिकारी और कर्मी शामिल हुए। बैठक के दौरान सिविल सर्जन ने मौजूद सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से बारी-बारी से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर से संबंधित आवश्यक जानकारी ली। जिसके बाद आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके अलावा मातृ एवं मृत्यु दर पर किस तरह सर्विलांस रिपोर्टिंग हो, इस पर विस्तृत चर्चा की गई। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, खगड़िया सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल प्रफुल्ल झा आदि मौजूद थे।
- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी :
बैठक के दौरान सिविल सर्जन ने कहा, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने, अर्थात रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। इसलिए, ऐसी घटना के कारणों की लोगों को जानकारी उपलब्ध कराएं और उन्हें बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दें। ताकि घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो और मातृ-मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, इसको लेकर सरकार द्वारा तमाम कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके और लोगों में जागरूकता आ सके। वहीं, उन्होंने कहा, मातृ एवं शिशु मृत्यु की रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित रूप से करें। ताकि घटना के कारणों की जानकारी मिल सके और फिर कारणों को दूर करने के लिए आवश्यक पहल की जा सके।
- मातृ-मृत्यु दर रोकने के लिए किए जा रहे हर जरूरी प्रयास :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने कहा, हर हाल में शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को रोकने के लिए हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। सुमन कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत मातृ मृत्यु दर की रिपोर्टिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मातृ-मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाता है। जबकि, मृत्यु के 24 घंटे के अंदर स्थानीय पीएचसी में सूचना देने पर आशा कार्यकर्ता को दो सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानियाँ होने पर 104 टाॅल फ्री नंबर काॅल कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता न सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती बल्कि, सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, महिलाओं को इसके जागरूक करने की जरूरत है। क्योंकि, मातृ-मृत्यु दर को कम करने, अर्थात रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
- जानें क्या है मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रेस्पांस प्रक्रिया :
यह एक प्रकार का मातृ मृत्यु के कारणों की पहचान, सूचित एवं समीक्षा करने की एक लगातार प्रक्रिया है। इसके जरिये कारणों का पता चलने के बाद आवश्यक उपाय करने के साथ देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाकर भविष्य में होने वाली मातृ मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार प्रति वर्ष 2.7 करोड़ से अधिक नवजात बच्चों की मौत 7 दिनों के अंदर और 2.6 करोड़ से अधिक नवजात बच्चों की मौत उसके जन्म से 28 दिनों के अंदर हो जाती है।
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रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Dr. Rajesh Kumar